डिंडौरी के छोटे से गाँव ढोंढ़ा का प्रगतिशील किसान बिहारीलाल साहू जैविक खेती में चमकता सितारा,जैविक खेती को लेकर हजारों किसानों,कॉलेज के सैकड़ों बच्चों, अनेक संगठन से जुड़े लोंगो को प्रशिक्षण दे चुके बिहारीलाल आज किसानों के प्रेरणास्रोत है,जिन्हें प्रदेश स्तर,कृषि विश्वविद्यालय स्तर अनेक पुरुस्कार मिल चुके है।
डिंडौरी:-वर्तमान के भागदौड़ भरी जिंदगी में अधिकतर लोगों को कोई बीमारी है और बीमारियों का जड़ है हमारा रासायनिक उत्पाद।अनमोल जीवन और जीवन दायनी मिट्टी की सुरक्षा और रासायनिक खाद से मुक्ति, जैविक खेती से हो सकती है, जैविक उत्पाद की जरूरत और संभावना को देखते हुए जैविक कृषि विशेषज्ञ बिहारीलाल साहू 2016 से गौ आधारित जैविक खेती की शुरुआत किया था,शुरुआत में इन्होंने जनजाति कल्याण केन्द्र महाकौशल बरगांव व अनेक संस्थानों में जाकर जैविक खेती का प्रशिक्षण प्राप्त किया और स्वंय जैविक खेती करने लगे।आज श्री बिहारी का ग्राम ढोंढ़ा और करौंदी में कई एकड़ में फैला नर्मदांचल जैविक कृषि फार्म है जिनमें अनेक प्रकार के जैविक फसल उगाए जा रहे है।
नर्मदांचल कृषि फार्म ढोंढ़ा और करौंदी में अनेक संस्थान,कॉलेज,संगठन से जुड़े किसान आकर प्रशिक्षण ले रहे है वही अनेक संस्थान द्वारा श्री बिहारी जी को जैविक खेती में प्रशिक्षण देने के लिए आमंत्रित किया जाता है। आज तक लगभग 15 हजार से अधिक किसानों को जैविक कृषि पर प्रशिक्षण दिया जा चुका है और क्षेत्र के लगभग 2000 से अधिक किसान जैविक खेती करने लगे हैं। डिण्डौरी जिले के अलावा अन्य जिला - जबलपुर,अनुपपुर,मण्डला,उमरिया शहडोल,कटनी आदि जिलों पर भी प्रशिक्षण का देने जाते है।
विभिन्न संस्थाओं के साथ मिलकर भी जैविक कृषि पर प्रशिक्षण देने का कार्य किया जा रहा है कार्य निरंतर जारी है। श्री बिहारी का कहना है की समाज के लोंगो के हित का कार्य ही हमारा लक्ष्य है।
बिहारी अनेक संगठन जैसे की नेहरू युवा केंद्र,जन शिक्षण संस्थान,तेजस्वनी महिला समूह,कार्ड संस्था,धारा सरस्वती शैक्षणिक एवं समाज उत्थान समिति,जनजाति कल्याण केन्द्र बरगांव,म.प्र. जन अभियान परिषद शहपुरा,आदि के साथ मिलकर जनसेवा का कार्य करते है |
जिस भूमि पर कभी घास नहीं होता था उस भूमि में जैविक प्रक्रिया अपनाकर 300 पौधे लगाकर तैयार किए है जो जनजाति कल्याण केंद्र महाकौशल बरगांव में एक बहुत ही सुंदर उद्यान बन चुका है।
नर्मदा समग्र अभियान के तहत भोपाल में प्रशिक्षण प्राप्त करके "खेती किसानी,नदी की जुवानी" कार्यक्रम विज्ञान भवन भोपाल में प्रशिक्षण प्राप्त कर लगातर 38 रविवार 09 माह से रविवार वृक्षारोपण कर रहे है।आज तक लगभग 510 पौधे लगा चुके हैं। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी लगातार पौधारोपण और जनजागृति लाने का कार्य श्री बिहारी कर रहे है।
किसानों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए 2020 में विगत 10 माह तक लगातार धारा सरस्वती शैक्षणिक एवं समाज उत्थान समिति के साथ मिलकर मिलकर स्वास्थ्य केम्प में सहभागी रहे।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी श्री बिहारी को अनेक राज्य स्तरीय पुरुस्कार मिल चुके है जिनमें से जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के कुलपति श्रीमान प्रदीप विशेन द्वारा कृषक वैज्ञानिक परिसंवाद में जैविक खेती पर उत्कृष्ट कार्य करने पर शील्ड और प्रमाणपत्र देकर सम्माननित किया गया।
जैविक कृषि पर विशिष्ट कार्य करने पर हम कांडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमान अधिवक्ता निशिकांत चौधरी द्वारा सम्मानित किया गया।
मध्यप्रदेश राज्य स्तरीय स्वर्गीय श्री प्रभाकर केलकर जैविक कृषि पुरुषकार से सम्मानित किया गया।महामण्डलेश्वर श्री श्री 1008 उत्तम स्वामी जी महाराज,भारतीय किसान संघ के अखिल भारती संगठन मंत्री श्रीमान दिनेश कुलकर्णी म.प्र.सरकार के कृषि मंत्री कमल पटेल जी के द्वारा जैविक खेती को लेकर सम्मानित किया गया।
ताराचंद बेलजी द्वारा प्रमाण पत्र से सम्मानित (2020 में) कुलगुड़ी बरेला में सम्मानित किया एवं आर्गेनिक ग्रोवर के प्रशिक्षक के रूप में जन शिक्षण संस्थान द्वारा प्रमाण पत्र से सम्मानित किया।
जनजाति कल्याण केन्द्र महाकौशल बरगांव एवं धारा सरस्वती शैक्षणिक एवं समाज उत्थान समिति द्वारा प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया।
कार्यालय आत्मा परियोजना डिण्डौरी द्वारा 26 जनवरी 2023 को जैविक कृषि में उत्तम कार्य के लिए पुरुषकार एवं प्रमाण पत्र दिया गया।
जैविक कृषि विशेषज्ञ बिहारीलाल साहू जी के कार्य Vidio देखने के लिए लिंक को क्लिक करें
नर्मदांचल जैविक कृषि फार्म में गौ आधारित जैविक खेती के तहत अनेक कार्य फसल और जैविक उत्पाद बनाये जा रहे है जिनमे से प्रमुख है-
सब्जी - गोभी, लोकी, भिंडी,बेगन बटवरी,टमाटर,आलू,ककड़ी,मिर्च,सेमी,मुनगा,भाजी आदि।
फसल- धान,मक्का,अरहर,कोदो, कुटकी,राम तिल,सरसों,राई,तिली (तिल),गेंहू,चना,मसूर,अलसी आदि। फल-पपीता,अमरूद,केला,आम ।
जैविक में खाद का प्रकार :- केचुआ खाद,जीवामृत,घन जीवामृत, अमृत पानी, फसल अमृत,अग्नी अस्त्र,ब्रम्हास्त्र,नीमास्त्र (नीमचटनी), वर्मीवाश,पंचगव्य, नील हरित शैवाल, जैव संजीवक,बायोगैस,स्लरी,सींग खाद,एजोला,बीजामृत,गौमूत्र, बीजामृत,आदि।
दिनांक:- 13/02/2023
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