देश का भविष्य बालकों पर निर्भर पर डिंडोरी कहीं इससे अछूता
निर्मल साहू (एड.) :- आज सभी लोग बाल दिवस पर इस दिन को बड़े हर्ष के साथ मानाते है कही तो सरकारी संस्था एवं गैर- सरकारी संस्था भी इस दिवस को मानाने के लिए अपनी तिजोरी से अच्छी बड़ी मात्रा में धन निकालकर खर्च करते है । लेकिन मात्र एक ही दिन ऐसे आयोजन करके बाल दिवस को सार्थक कैसे बनाया जा सकता है। वही दूसरी ओर देखा जाए तो कुछ राजनितिक प्रतिनिधि तो अखबारों में सुर्खियाँ बटोरने में लगे होते है ।
जबकि आज बच्चों की सुरक्षा के लिए अनेक कानून बने हुए हैं । बाल और किशोर(सुरक्षा और विनियम) अधिनियम 1986, माइंस एक्ट 1952, संविधान , IPC-1860 , फैक्ट्री अधिनियम 1948 इत्यादि इन सभी में प्रावधान दिया हुआ है की किसी बच्चा जिसकी उम्र 14 वर्ष से कम है उससे किसी भी प्रकार से काम नहीं लिया जा सकता तथा 14-18 वर्ष के किशोर को किसी घातक कार्य में अर्थात कंपनी बगैर में नहीं रखा जा सकता ।
लेकिन आज भी डिंडोरी जिला में कुछ होटलों एवं अन्य घरेलू कार्य में बच्चों से कार्य लिया जा रहा है ,तो कही -कही तो बच्चे भीख मांग रहे है, तो कही सडकों में आवारा , बेसाहरा घूम रहे होते है । यह खबर किसी भी प्रबुद्धजन को जैसे पता ही न हो ऐसा लगता है, लेकिन बाल दिवस में भाषणबाजी करने से चूकते नहीं है । सरकार की अनेक योजना ऐसा लगता है की डिंडोरी तक आते-आते दम तोड़ देती है। खैर, यदि ऐसा ही चलता रहा तो देश का भविष्य किनके हाथों में होगा यह कही प्रश्न बनकर ही न रह जाए, क्योकिं देश की आबादी के लगभग 60 प्रतिशत लोग तो युवा ही है ।
जबकि आज बच्चों की सुरक्षा के लिए अनेक कानून बने हुए हैं । बाल और किशोर(सुरक्षा और विनियम) अधिनियम 1986, माइंस एक्ट 1952, संविधान , IPC-1860 , फैक्ट्री अधिनियम 1948 इत्यादि इन सभी में प्रावधान दिया हुआ है की किसी बच्चा जिसकी उम्र 14 वर्ष से कम है उससे किसी भी प्रकार से काम नहीं लिया जा सकता तथा 14-18 वर्ष के किशोर को किसी घातक कार्य में अर्थात कंपनी बगैर में नहीं रखा जा सकता ।
लेकिन आज भी डिंडोरी जिला में कुछ होटलों एवं अन्य घरेलू कार्य में बच्चों से कार्य लिया जा रहा है ,तो कही -कही तो बच्चे भीख मांग रहे है, तो कही सडकों में आवारा , बेसाहरा घूम रहे होते है । यह खबर किसी भी प्रबुद्धजन को जैसे पता ही न हो ऐसा लगता है, लेकिन बाल दिवस में भाषणबाजी करने से चूकते नहीं है । सरकार की अनेक योजना ऐसा लगता है की डिंडोरी तक आते-आते दम तोड़ देती है। खैर, यदि ऐसा ही चलता रहा तो देश का भविष्य किनके हाथों में होगा यह कही प्रश्न बनकर ही न रह जाए, क्योकिं देश की आबादी के लगभग 60 प्रतिशत लोग तो युवा ही है ।


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