शबरी के झूठे बेर खा सकते हैं राम, तो मैं क्यों नहीं? कविराज विकास कुमार (अधिवक्ता)
🤔 *क्यों नहीं* 🤔 शबरी के झूठे बेर खा सकते हैं राम, तो मैं क्यों नहीं?🤔 तो मै क्यो नही? ईश्वर ने जाति के भेद में निहितार्थ दिया ज्ञान नही, तो मैं इंसानों के बीच जाति के भेद को, तोड़ सकता क्यों नहीं?🤔 यदि शिक्षा विशेष वर्गों का शस्त्र है, तो मैं भी अपने ज्ञान से, उनका सामना कर सकता। क्यों नहीं?🤔 यदि गीता ईश्वर उपदेश है,और यथार्थ है, तो जीवन के अनुसरण के लिए, गीता को माध्यम बना सकता क्यों नहीं?🤔 हम पाखंड में लिप्त हैं मस्त हैं, पश्चिमी देश विकास की धारा मे व्यस्त है। तो हम क्यों नहीं?🤔 हम क्यो नही? विडियो देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें यदि आप धार्मिक हैं, संस्कारी श्रेष्ठ है , तो व्याभिचार-भ्रष्टाचार-हिंसा मिटा पा रहे। क्यों नहीं?🤔 हम जीवन रूपी सुलझन में उलझे हुए, निरंतर अंधविश्वासों में झुलसे हुए। फिर भी हमारी प्रगति न हो पा रही। क्यों नहीं, आखिर क्यों नहीं।🤔 मा रुपी गंगा का, सरस्वती रूपी शिक्षा का,धन रुपी लक्ष्मी का सदुपयोग कर सकते नहीं, तो मैं आपको दोगलेपन की संज्ञा दे सकता क्यों नहीं? क्यों नहीं?🤔 रिश्तों का हर बजार भाव लगा लिए, प्रेम को फांसी हर चौरा...