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यह इश्क है दीवानों का - पाचवा अंक

कुछ दिनों के बाद ही जब नायिका अपने कार्य से शहर आने की बात करती है तब नायक भी कहता है यदि आप मिलेगे तो मैं आऊगा ,नायिका तो पहले मा करती है कि समय मिलेगा तो मिल पाएंगे नहीं तो ,नहीं मिल पाएंगे ,,,परन्तु नायक कहता है कि पक्का मिलेगे आप तो मैं आऊ नहीं तो नहीं आने बाला ,तब नायिका कहती है ठीक है एक घंटे का समय निकाल लुगी, फिर उस दिन भी नायक , नायिका को उसके कार्य स्थल से लेकर ,घूमने के लिए जाते है ,,,गाड़ी चल रही होती है और दोनों आपस में बातें कर रहे होते है ,, जमाने भर की बात होती है, लेकिन उस दिन भी नायिका पहली मुलाकात के दिन कि तरह ,कुछ सहमी सी , डरी सी लगती है , नायक बार बार उससे पूछता है कि क्या हो गया आपको ,,फोन में तो बाते अच्छे करते है पर आज फिर क्या हो गया ? नायिका का एक ही जवाब होता है मुझे नहीं पता क्यू दर लगती है आपसे , नायक कहता है हां ठीक है कुछ दिनों के बाद नहीं लगेगी ,,,,, दोनों घूमते घूमते लगभग 30 किलोमीटर दूर चले जाते है पर समय का पता भी नहीं चलता कि इतने दूर आ गए और नायिका को घर भी जल्दी जानी थी, फिर नायक कहता है नायिका को चलिए हम आपको घर तक छोड़ आते है पर नायिका माना ...