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Showing posts from July 30, 2018

वैवाहिक प्रताड़ना

निर्मल साहू (एड.):- अगर विकसित समाज को छोड़ दे तो ज्यादातर में यह परम्परा प्रचलित है कि एक बार विवाह हो जाने के बाद स्त्री के जीवन से सम्बंधित फ़ैसले करने का अधिकार उसके पति या ससुराल का ही हो जाता है । जहा तक कानून का सवाल है कि हमारा संविधान हर नागरिक को यह स्वतंत्रता तो देता है कि विवाह के में एक वयस्क दूसरे वयस्क का चुनाव कर सकता है, इसी तरह बाल-विवाह को इजाजत नहीं देता है यानि उम्र से पहले और इच्छा के विरुद्ध विवाह अमान्य है और ऐसा करने एवं मजबूरन करवाने वाले को दण्ड का प्रावधान है । आजकल वैवाहिक प्रताड़ना बढ़ने लगी है समाज चाहे कोई भी हो हर वर्ग, जाति, धर्म के बीच में विवाह को लेकर कलह बढ़ता जा रहा है और दाम्पत्य जीवन सुखमय नहीं है इसके कारण अनेकों है जिसमे समाज के जागरूक तबको में भी तलाक के मामले बढ़ रहे है इसका एक कारण बेमेल विवाह या विवाह उपरांत की जाने वाली जबरजस्ती । महिलाओं में अवसाद जैसी बीमारियों के बढ़ने की बड़ी बजह जबरन शादी भी है लेकिन सायद हमारा समाज इस विवाह की पहलू पर विचार ही नहीं करता है और मान्यताओं एवं परम्पराओ की दुहाई दी जाती है । आज के परिवेश में देखा जाए तो समा...