जज़्बा लक्ष्य प्राप्ति का हो तो लक्ष्य मूवी की तरह लगन होनी चाहिए
अमित सिंह (SDM):- लक्ष्य मूवी का अवलोकन कीजिए आपको वो सब पता चलेगा की एक लक्ष्य एक सफलता एक उद्देश्य क्या मायने रखता है जीवन में हम सहज तो रहते है कुछ बनने के लिए लेकिन वो प्रतिबद्धता शायद हम में कुछ कम होती है और हम लक्ष्य के इतने समीप होकर भी बहुत दूर होते जाते है कोई भी हमारा उद्देश्य हो वो तब तक पूरा नही होता जब तक हम उसे अपने अंदर समाहित ना कर ले उसे महसूस ना कर पाये 24 घण्टे हमारे मन में वहीँ धुन सी सवार हो की अरे ये अभी हो नही पाया है इसे पूरा करना है फिर चाहे धूप हो छाया हो गर्मी हो ठण्ड हो प्यास लगी हो भूख लगी हो या अन्य ये हर पल हमे उद्देलित करता है अपने अंतर्मन को कचोटता रहता है ।हम इस अवस्था में लगभग शून्यवत हो जाते है समाज से कट जाते है अपनों से उतने समय के लिए दूर से हो जाते है भले फिर दुनिया कुछ भी कहे मौलिक चिंतन सिर्फ उद्देश्य पर ही होता है ठीक वेसे ही जेसे अर्जुन का ध्यान आँख पर या योग की परिभाषा में कहे तो हमारा आज्ञाचक्र जो दोनों आँखों के मध्य भौहों के बिलकुल बीच जो होता है वो काफी हद तक जाग्रत हो जाता है जो आप यदि देखे तो कई लोग कल का काम कल देखा जाएगा की सोच...