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जबलपुर की यादें व् प्यार की कहानी

दीपिका सोनी (लेखिका) :- ए जबलपुर तुझे छोड़ा कैसे जाये, बंधन ये प्यार का तुझसे तोड़ा कैसे जाये.. तेरी हर गली से है मुझे प्यार, तेरी हर बात के हैं हम हकदार. बचपन बीता यहीं, यहीं मिली दुनिया हमें. दुनिया के किसी भी कोने में रहे, हर दम याद करेंगे तुझे. ऐसी खुशियों से मुंह मोड़ा कैसे जाय, ए जबलपुर तुझे छोड़ा कैसे जाये.... तेरी चौपाटी की पानीपुरी, कहां मिलेगी ऐसी? नहीं होगी कोई भेल , बच्चू के भेल के जैसे. ४ सीजंस की पेस्ट्री मुंह में पानी लाए, तीन पत्ती और श्याम के समोसे मन को भाए. बड़कुल की जलेबी, हीरा की मिठाई, कैसे सहेंगे हम इन सब की जुदाई? लज़ीज़ खाने का लालच तोड़ा कैसे जाए, ए जबलपुर तुझे छोड़ा कैसे जाए.... मेहमानों को धुआंधार घुमाना, किले ले जाकर दुर्गावती के किस्से सुनना, कचनार के भव्य शिव के दर्शन करना, दोस्तों के साथ बरगी और ग्वारीघाट घूम के आना. सारे मस्ती के पलों को भूला कैसे जाय, ए जबलपुर तुझे छोड़ा कैसे जाए.... नर्मदो महोत्सव की चांदनी रात में थिरकना, मानस भवन के स्टेज पर प्रतियोगिता में उतरना. स्कूल की मस्ती, कॉलेज की मौज, हर पिक्चर पर पहुँचती यारों की फ़ौज. ...