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दिव्यदृष्टी की शक्ति का नाम है पत्रकारिता

निर्मल साहू(एड.):- पत्रकारिता का नाम सुनते ही जहन में आता है कि कैमरा,अखबार,चैनलों का मंच जिसमें लोग आंचलिक,प्रादेशिक व देश स्तर में सामाजिक,आर्थिक,राजनीतिक,शैक्षणिक एवं अनन्य विषयों में समाज को आइना दिखाने का कार्य कर रहे हैं तथा सरकार और जनता के बीच एक सेतु का कार्य कर रहे है,,, ऐसा भी माना जाता है कि सरकार के चौथा स्तब्ध के भांति कार्य कर रहे है जबकि संविधानिक तौर से सरकार की तीन अंग है जिसमें व्यवस्थापिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका प्रमुख हैं जिनके कर्मचारी, अधिकारी एवं चयनित, नामित जनता के प्रतिनिधियों सभी को मानदेय,वेतन और सरकारी सुविधाएं प्रदान की जाती है, लेकिन न्यायपालिका के आभिन्न अंग माने जाने वाले अधिवक्ताओं को न तो सुरक्षा दी जाती है और न ही वेतन ......! वैसे ही सरकार के चौथा स्तंभ के भांति कार्य करने वाले पत्रकार बंधुओ को भी नहीं दी जा रही सरकारी सुविधाएं जबकि शिखर में बैठे राजा को दिव्यदृष्टी के भांति दूर बैठकर हर घटना की जानकारी सरलता से पत्रकार बन्धु पहुंचाने का कार्य कर रहे है , खेद इस बात का है कि अपने जान जोखिम में रखकर पत्रकार अलग अलग चुनौतियों का सामना करते हु...