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गणेश उत्सव,अनंत ऊर्जा-परम् शक्ति के अनुभव का मज़ेदार मार्ग है❗

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डिण्डोरी :- वर्तमान समय में गणेश उत्सव की धूम चारों तरफ है। भगवान गणेश,कण कण में विराजमान हैं,ऐसा हम सभी जानते और मानते हैं। हम ये भी मानते हैं कि परमात्मा एक है,उनके रूप,अनेक है। परमात्मा के एक रूप है भगवान गणेश ।     इतनी बात हम सभी लगातार सुनते आ रहे हैं लेकिन अधिकतर साथियों का अनुभव नहीं है कि भगवान गणेश कण कण में है,अगर अनुभव होता तो हमारे अंदर सभी के प्रति प्रेम होता।     श्री गणेश उत्सव को हम सभी भक्ति भाव से मनाते हैं। आप थोड़ा होश से अपने आप को वॉच करें, आप गणेश पंडाल में जाते हैं तो आपका भाव निर्मल हो जाता है,पवित्र हो जाता है।     परमात्मा और इंसान का संबंध विचारों से नहीं,भाव से होता है, हम परमात्मा को शांत रहकर, पवित्र भाव से पूजा अर्चना करते हैं,बिना भाव के आप भगवान की भक्ति नहीं कर सकते।      गणेश उत्सव में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भाग लेने से हमारे अंदर पवित्र भाव की अधिकता होती है,हमारे अंदर प्रेम का विकास होता है।     हमारे सही या गलत का फैसला भगवान हमारे भाव से करते हैं।भगवान हमारे अंदर उठ रहे भाव...

होश (awareness) ही ध्यान है । - रजनीश ओशो

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मेरे प्रिय               प्रेम ,       आत्मा या परमात्मा या अनात्मा-जैन, हिन्दू या बौद्ध- सभी शब्द अंश- सत्य को प्रकट करते है। और पूर्ण सत्य अभिव्यक्त नहीं होता है । क्योंकि शब्द उसके लिए अति छोटे और संकरे है । इसलिए शब्दों में न उलझें  और जो भी ठीक लगे-रूची अनुकूल हो,उसे चुन लें । और कोई भी शब्द न चुनें,तब भी साधना में कोई बाधा नही पड़ती है । वस्तुतः तो, बाधा शब्दों के आग्रह से ही पड़ती है । यहूदियों का जो परमात्मा के लिए जो शब्द है, वह है याहवेह (Yahveh) या  यहोबा (Yahoba)  और उसका अर्थ होता है अनाम (no name or nameless)  सिध्दांतों, शास्त्रों और वादों से सत्य की खोज का दूर का भी संबंध नहीं है। इसलिए, शास्त्रों से बचे तो अच्छा है । अन्यथा, साधना से बच जायेंगे । साधना करें -साक्षी-भाव की । विचार हों या भाव, क्रियाएं हो या प्रतिक्रियाएं - सबके प्रति साक्षी (Witness) हो । जीवन-धारा बेहोश(unconscious)  न रहे ।  होश (awareness) का ही ध्यान करें । होश ही ध्यान है । और शेष प्रभु पर छोड़ दें या याहवेह ...