सत्य क्या है ? यह विस्मय—भरा विश्व क्या है ? इसका बीज क्या है ? विश्व–चक्र की धुरी क्या है ? रूपों पर देवी कहती है:-हे शिव, आपका सत्य क्या है ? यह विस्मय—भरा विश्व क्या है ? भगवान शिव- पार्वती संवाद- रजनीश ओशो के अनुसार ।
देवी कहती है:-हे शिव, आपका सत्य क्या है? यह विस्मय—भरा विश्व क्या है? इसका बीज क्या है? विश्व–चक्र की धुरी क्या है? रूपों पर छाए लेकिन रूप के परे यह जीवन क्या है? देश और काल, नाम और प्रत्यय के परे जाकर हम इसमें कैसे पूर्णत: प्रवेश करें? मेरे संशय निमूर्ल करें। कुछ भूमिका की बातें। एक कि विज्ञान भैरव तंत्र का जगत बौद्धिक नहीं है, वह दार्शनिक नहीं है। सिद्धांत इसके लिए अर्थ नहीं रखता। यह उपाय की, विधि की चिंता करता है, सिद्धांत की कतई नहीं। तंत्र शब्द का अर्थ ही है विधि, उपाय, मार्ग। इसलिए यह कोई मीमांसा नहीं है, इस बात को ध्यान में रख लें। बौद्धिक समस्याओं और उनके ऊहापोह से इसका कोई संबंध नहीं है। यह चीजों के ‘क्यों’ की चिंता नहीं लेता, उनके ‘कैसे’ की चिंता लेता है, सत्य क्या है इसकी नहीं, वरन इसकी कि सत्य को कैसे उपलब्ध हुआ जाए। तंत्र का अर्थ विधि है इसलिए यह एक विज्ञान—ग्रंथ है। विज्ञान ‘क्यों’ की नहीं, ‘कैसे’ की फिक्र करता है। दर्शन और विज्ञान में यही बुनियादी भेद है। दर्शन पूछता है. यह अस्तित्व क्यों है? विज्...