कही डिंडोरी तो धुएँ के धुंध में फँस न जाए दिल्ली की तरह...
निर्मल साहू (एड.) डिंडोरी:- आज कल लोग इतना व्यस्त हो चुके है की प्राकृति का किसी को ध्यान भी नहीं है, सब अपने-अपने कामों में लगे होते है । इसी कारण से लोग अपनी प्राकृति को न तो संरक्षित करते है और न ही पालन-पोषण ही करते है , पर यदि चंद लोग इस काम में लगे होंगे तो जारूर यह कहेगें की कुछ तो स्वार्थ होगी यह काम करने में , मैं , डिंडोरी , शहपुरा की बात कर रहा हूँ की यहाँ ,जहाँ देखो वहा कचरा पड़ा होता है और लोग बड़े चाव से गंदगी करने में लगे हुए है वह दिन दूर नहीं है यदि इसे रोका न गया तो दिल्ली की तरह अपने जिला की हालत वैसे होगी जैसे अभी दिल्ली की है । पिछले साल की धुंध के बारे में वैज्ञानिकों का अनुमान था कि वह दिवाली के मौके पर दिल्ली की भयंकर आतिशबाजी और पंजाब-हरियाणा में जलाई जाने वाली पराली की देन थी। विचित्र स्थिति यह भी है कि मौसम विज्ञानी अब भी कोई सटीक कारण प्रस्तुत नहीं कर पा रहे हैं। इस बारे में जरूर कमोबेश सहमति है कि इसकी वजह प्रदूषण ही है। इनमें वाहन प्रदूषण, कारखाना प्रदूषण, पराली का धुआं, धूल आदि का समुच्चय शामिल है। अनुमान है कि दिल्ली और उसके आसपास यही...