कही डिंडोरी तो धुएँ के धुंध में फँस न जाए दिल्ली की तरह...

 निर्मल साहू (एड.) 
डिंडोरी:- आज कल लोग इतना व्यस्त हो चुके है की प्राकृति का किसी को ध्यान भी नहीं है, सब अपने-अपने कामों में लगे होते है । इसी कारण से लोग अपनी प्राकृति को न तो संरक्षित करते है और न ही पालन-पोषण ही करते है , पर यदि चंद लोग इस काम में लगे होंगे तो जारूर यह कहेगें की कुछ तो स्वार्थ होगी यह काम करने में , मैं , डिंडोरी , शहपुरा की बात कर रहा हूँ की यहाँ ,जहाँ देखो वहा कचरा पड़ा होता है और लोग बड़े चाव से गंदगी करने में लगे हुए है वह दिन दूर नहीं है यदि इसे रोका न गया तो दिल्ली की तरह अपने  जिला की हालत वैसे होगी जैसे अभी दिल्ली की है ।
पिछले साल की धुंध के बारे में वैज्ञानिकों का अनुमान था कि वह दिवाली के मौके पर दिल्ली की भयंकर आतिशबाजी और पंजाब-हरियाणा में जलाई जाने वाली पराली की देन थी। विचित्र स्थिति यह भी है कि मौसम विज्ञानी अब भी कोई सटीक कारण प्रस्तुत नहीं कर पा रहे हैं। इस बारे में जरूर कमोबेश सहमति है कि इसकी वजह प्रदूषण ही है। इनमें वाहन प्रदूषण, कारखाना प्रदूषण, पराली का धुआं, धूल आदि का समुच्चय शामिल है। अनुमान है कि दिल्ली और उसके आसपास यही स्थिति अगले बहत्तर घंटों तक बनी रहेगी। इसकी एक वजह यह बताई जा रही है कि बंगाल की खाड़ी में हवा का रुख अभी उत्तर-पश्चिम की ओर बना हुआ है और उसकी रफ्तार भी मद्धिम है। इसके बाद हवा का रुख पूरब की ओर होगा तो हवा तेज होगी। तब शायद, निर्लज्ज अतिथि की तरह वायुमंडल में पसरा यह कुहासा दफा हो।
फिलहाल दिल्ली और उसके आसपास न सिर्फ सांस के रोगियों बल्कि स्वस्थ लोगों के लिए भी यह धुंध मुसीबत का सबब बन गई है। वातावरण में विषैले कणों (पर्टिकुलेट मैटर) की मात्रा निरापद मानी जाने वाली सीमा से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। इससे सांस लेने में मुश्किलें हो रही हैं। दृश्यता घट जाने से हर तरफ यातायात में बाधा आई है और रास्तों में जगह-जगह जाम की स्थिति हो रही है। प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए दिल्ली सरकार ने प्राथमिक स्कूलों को बुधवार को बंद रखने का एलान किया है। ‘सफर’ (सिस्टम आॅफ एअर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च) ने दिशा-निर्देश जारी कर सेहत की दृष्टि से नाजुक स्थिति वाले लोगों को घरों से बाहर निकलने से मना किया है और सुबह-शाम गतिविधि कम करने तथा अच्छी गुणवत्ता के मॉस्क लगाने की भी सलाह दी है। इस धुंध की वजह प्रदूषण हो या नहीं, इसमें दो राय नहीं कि दिल्ली में प्रदूषण एक बड़ी समस्या है और यह आपदा की शक्ल लेती जा रही है। इसलिए यहां प्रदूषण से निपटना एक ऐसा अनिवार्य तकाजा है जिसे अब टाला नहीं जा सकता।

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