*जैविक विधि से तैयार पौधों के लिए जीवामृत है अनमोल*



कृषकों के कीमती फसलों के लिए जीवामृत अनोखी दवा है जिसका फायदे अनेक है व कोई दुष्परिणाम नहीं है

डिंडोरी/शहपुरा:-भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष व जैविक कृषि प्रशिक्षक बिहारी लाल साहू द्वारा जीवामृत बनाने का दिया गया प्रायोगिक जानकारी।
 निर्माण सामग्री एक एकड़ हेतु:-
10 किग्रा देशी गाय का गोबर,10 लीटर गौमूत्र,2 किग्रा बेसन,2 किग्रा देशी गाय की दही,500 ग्राम गुड़,1 किग्रा बड़ या पीपल के पेड़ की मिट्टी,और 180 लीटर पानी।
*जीवामृत बनाने की विधी*
सर्व प्रथम कोई प्लास्टिक का डम लें या सीमेंट की टंकी उस पर 180 लीटर पानी डालें।
एक बड़ी प्लास्टिक के टप में (organic farming )गोबर,गौमूत्र,मिट्टी,बेसन,दही,गुड़ ये सभी को अच्छी तरह से फेंटकर या मिलाकर उसे प्लास्टिक के डम या टंकी मे डालकर पानी के साथ मिलाएं।सुबह-शाम डंडे से घोल को 12-12 बार बांयी से दांयी ओर और दांयी से बांयी ओर घुमाएं , 5 दिनों के बाद जीवामृत तैयार हो जाता है।
   इस जीवामृत का प्रयोग केवल 10 दिनों तक कर सकते हैं, प्लास्टिक व सीमेंट की टंकी को छाया पर रखें, जहाँ धूप ना लगे,गौमूत्र को धातु के बर्तन में ना रखें,छाए में रखा हुआ गोबर का ही उपयोग करें।
 उपयोग की विधि:- 
 प्रति एकड़ 200 लीटर तैयार जीवामृत सिंचाई के बहते पानी पर बूंद-बूंद टपका कर दें।फसलों और पौंधो पर जीवामृत का छिड़काव कर दें।नमी युक्त भूमि पर छिड़कें।
लाभ:
छिड़काव करने से उनको उचित पोषण मिलता हैं,और दाने फल स्वस्थ होते हैं,भूमि उपजाऊ होती है,पोषक तत्वों की कमी दूर हो जाती है,सूक्ष्मजीव की मात्रा बढ़ती हैं,मुर्झाए हुए फसलों या पौधों को जीवित कर देते हैं अन्य प्रकार के से बीमारियों से बचाया जा सकता है।
5 जुलाई 2022

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