प्रशासनिक कुनबे में ही बढ़ी भ्रष्टाचार की मांग

शहपुरा:- आज तक आप सभी लोगों ने सुना होगा कि फलाने प्रशासक ने कुछ कार्य किए जाने के एवज में जनता से कुछ रकम की मांग की है, यह माना जाने लगा कि प्रशासनिक तंत्र में कुछ ऐसे प्रशासक भी हैं जिनको पैसों से इतना मोह है कि अपने वैतनिक पैसे से काम न चलने पर जनता के सेवा करने के एवज में पैसों की मांग की जाती है ।
यह दशा आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र जिला डिंडोरी से लेकर समस्त 7 विकासखंड में देखने एवं सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी मिल रही है।
बात गंभीर तब हो जाती है जब प्रशासनिक अधिकारियों के नाम से अधीनस्थ अधिकारी अपने ही कुनबे के अधिकारी/कर्मचारियों से पैसों का मांग करने लगे है, जब अधिकारी/कर्मचारी पैसे देने से मना करते है  तो उन्हें ही सेवा से बर्खास्त किए जाने की धमकी देकर, शारीरिक एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है ।
*भ्रष्टाचार की इस तरह की मांग* को देखकर यह लगता कि *सेवा के बदले मेवा*  चाहिए अब प्रशासकों को, जो कि कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को धूमिल करते नजर आ रहे है ।
यह अत्यंत दुख की बात है कि भ्रष्टाचार मिटाने का जिम्मा जिनके हाथों में है उनके ही हाथ भ्रष्टाचार में लिप्त नज़र आते दिख रहे है ।

स्वतंत्र टिप्पणीकार

निर्मल कुमार साहू(एड.)
बी.ए.एलएलबी
एल एल. एम. (अपराध शास्त्र) 
एम. ए. (राजनीतिक शास्त्र)
nirmalkumaradv.18@gmail.com

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