समय के दामन में दफन हो जाते है दिल के विश्वास

जब कभी किसी से बाते होने लगती है तो यह स्वाभाविक सी बात है कि उनके बीच धीरे धीरे सम्बन्ध अच्छे बनने लगते है जो जिससे अधिक बाते करेगा, देखरेख करेगा , चिंता करेगा तो उनके बीच अच्छा संबंध निर्मित ही जाता है ,,,,विश्वास भी बढ़ने लगता है, लेकिन अचानक कभी कभी यह होता है, दोनों में से कोई यदि एक दूसरे के बातों को अहमियत नहीं  देते तो संबंध की प्रगाड़ता में कमी आती है और संवाद भी धीरे धीरे बंद होता चला जाता है ।
इसलिए कहते है कि संवाद ही रिश्तों को जिंदा रखने का एक मात्र उचित साधन है ,पर कुछ चंद लोग इसे नहीं समझे और हर चीज पैसे से खरीदने की कोशिश करते हैं लेकिन उन्हें यह पता नहीं कि खुशियां और दिल की चाहत पैसे से नहीं खरीदी जा सकती यह तो मात्र एक स्वाभाविक क्रिया है, जो दिलों के अच्छे संबंधों के वजह से समाज में फल फूल रही है।
समाज में हर किसी की कुछ न कुछ चाहत होती है किसी को पैसों की, किसी को दूकान रखने की किसी को घर की खुशियों कि , किसी को अपने दिल की इस प्रकार हर किसी की चाहत होती है ।
और बस यही बाहरी चाहत तो है जो आपसी रिश्तों और दिल से जुड़े संबंधों को आसानी से तोड़ देते हैं ,,,,,,,,,,!!

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