यह इश्क है दीवानों का ,,,,, छटवा अंक
नायिका घर के लिए चली जाती है नायक भी घर चला जाता है घर जाते जाते वह उस पल को याद करता जाता है वह पल जो नायिका के साथ, नायक ने बिताई थी,,,,,वह नायिका की सर्मिली हरकतों को ,तो कहीं उसके बाते करने की तरीकों को तो कहीं ,,,,न कहने वाली मीठी बातो को याद करता जाता है ,घर पहुंचकर तुरंत वह मेसेज भी करता है कि मैं पहुंच गया ,नायिका भी कहती है हां मैं भी पहुंच गई हूं ।
नायक और नायिका हर दिन बाते करते की क्या चल रहा है ,क्या खाया आज तो ,कहा जाने वाले है ऐसे ही कई विषयों में बाते होती रहती ,,,कभी कभी बात न होने पर नायक परेशान भी होने लगता ,,तो नायिका कहती है आप इतने घबराते क्यू है ,नायक कहता अरे मैं क्यू घबराता हूं मुझे पता नहीं है ।
एक दिन की बात है साम का समय था जब नायक ने नायिका को मेसेज किया तब नायिका का भी मेसेज आया तब नायक गुस्से में रहता है ।
और नायिका से रूखे धुन में बाते करता है और उसका एक ही प्रश्न रहता है कि क्या आप मेरे से शादी करेगे ...?
तब नायिका कहती है देखिए ,,,,हम एक को लेकर नहीं चल सकते हमे सब को लेकर चलना है और फिर झट से कहती है हम आपके लायक नहीं है, आप कोई और देख लीजिए ,पता नहीं हमारी शादी हो पाती है या नहीं ,,,,,।
इतना सुनकर नायक का गला भर जाता , हिम्मत ही नहीं होती कि बात कर सके ,,,मन ही मन रोने लगता है और कड़े शब्दों में नायिका से कहता है कि क्या मैं समय पास कर रहा हूं आपसे बात करके ,,,मै तो आपसे शादी करने के हिसाब से बाते कर रहा हूं पर आपने मुझे समझा नहीं ।
इतना कहने पर नायिका कहती है यह तो सब किस्मत की बात है हम क्या बता सकते है कि शादी हो पाएगी या नहीं किस्मत में होगी तो निश्चित ही होगी ,,,फिर नायक कहता है कि किस्मत से बात करनी पड़ेगी क्या अब ,,,आपको पाने के लिए ,,,आप स्वयं निर्णय नहीं ले सकते क्या ,,,,,इस प्रकार दोनों में बहुत कहा सुनी होने लगी ,,,,थोड़ी देर बाद दोनों फिर अच्छे से बात करने लगे ,,,,,यही तो इश्क है ।
नायक ,,,,,,प्यार में शर्ते लाने लगा था कि शादी करनी है इस बात को सुनकर ,,,हमेशा नायिका ,,,चुप रह जाती और अपने परिजन के ऊपर इस विवाह के विषय को छोड़ देती की जैसे भी होगा परिजन जाने ,,,,,,फिर बार बार नायक के कहने पर नायिका कहती ठीक है ,,, करेगें ।
नायक भी कह दिया कि ठीक है परिजन से बात करेंगे जब विवाह का समय आएगा तब ,,,और यह भी कहता यदि आप तैयार होते है और कोई भी तैयार नहीं होता, तो आपको कोई रोक नहीं सकता मेरे से विवाह करने में इस प्रकार बाते होती रहती ।
लेकिन अभी भी नायिका डर रही थी,,,,इसे जानने के लिए नायक कहता है कि आप इसलिए डरते है की कहीं में आपके साथ कुछ गलत मतलब सम्बन्ध तो न बना लू ,,,।
इसी बात से डर लगती है न ,,तब नायिका कहती है हैं यही बात सच है पर मैं बोल नहीं पा रही थी कि कहीं आपको बुरा तो न लग जाए ।
नायक कहता है इसमें बुरा लगने की बात क्या है जो भी कहना है स्पष्ट कहना चाहिए तो अच्छा लगता है बुरा नहीं लगता है, इर नायक वादा करता है कि इसकी चिंता न करें मैं कुछ ऐसा गलत नहीं होगा ,तब जाकर नायिका को तसल्ली होती है और कहती है हां अब मैं आज से एक भी नहीं भयभीत होऊंगी आपसे ,,,,,,।
.................कहनी अब तक .....
नायक और नायिका हर दिन बाते करते की क्या चल रहा है ,क्या खाया आज तो ,कहा जाने वाले है ऐसे ही कई विषयों में बाते होती रहती ,,,कभी कभी बात न होने पर नायक परेशान भी होने लगता ,,तो नायिका कहती है आप इतने घबराते क्यू है ,नायक कहता अरे मैं क्यू घबराता हूं मुझे पता नहीं है ।
एक दिन की बात है साम का समय था जब नायक ने नायिका को मेसेज किया तब नायिका का भी मेसेज आया तब नायक गुस्से में रहता है ।
और नायिका से रूखे धुन में बाते करता है और उसका एक ही प्रश्न रहता है कि क्या आप मेरे से शादी करेगे ...?
तब नायिका कहती है देखिए ,,,,हम एक को लेकर नहीं चल सकते हमे सब को लेकर चलना है और फिर झट से कहती है हम आपके लायक नहीं है, आप कोई और देख लीजिए ,पता नहीं हमारी शादी हो पाती है या नहीं ,,,,,।
इतना सुनकर नायक का गला भर जाता , हिम्मत ही नहीं होती कि बात कर सके ,,,मन ही मन रोने लगता है और कड़े शब्दों में नायिका से कहता है कि क्या मैं समय पास कर रहा हूं आपसे बात करके ,,,मै तो आपसे शादी करने के हिसाब से बाते कर रहा हूं पर आपने मुझे समझा नहीं ।
इतना कहने पर नायिका कहती है यह तो सब किस्मत की बात है हम क्या बता सकते है कि शादी हो पाएगी या नहीं किस्मत में होगी तो निश्चित ही होगी ,,,फिर नायक कहता है कि किस्मत से बात करनी पड़ेगी क्या अब ,,,आपको पाने के लिए ,,,आप स्वयं निर्णय नहीं ले सकते क्या ,,,,,इस प्रकार दोनों में बहुत कहा सुनी होने लगी ,,,,थोड़ी देर बाद दोनों फिर अच्छे से बात करने लगे ,,,,,यही तो इश्क है ।
नायक ,,,,,,प्यार में शर्ते लाने लगा था कि शादी करनी है इस बात को सुनकर ,,,हमेशा नायिका ,,,चुप रह जाती और अपने परिजन के ऊपर इस विवाह के विषय को छोड़ देती की जैसे भी होगा परिजन जाने ,,,,,,फिर बार बार नायक के कहने पर नायिका कहती ठीक है ,,, करेगें ।
नायक भी कह दिया कि ठीक है परिजन से बात करेंगे जब विवाह का समय आएगा तब ,,,और यह भी कहता यदि आप तैयार होते है और कोई भी तैयार नहीं होता, तो आपको कोई रोक नहीं सकता मेरे से विवाह करने में इस प्रकार बाते होती रहती ।
लेकिन अभी भी नायिका डर रही थी,,,,इसे जानने के लिए नायक कहता है कि आप इसलिए डरते है की कहीं में आपके साथ कुछ गलत मतलब सम्बन्ध तो न बना लू ,,,।
इसी बात से डर लगती है न ,,तब नायिका कहती है हैं यही बात सच है पर मैं बोल नहीं पा रही थी कि कहीं आपको बुरा तो न लग जाए ।
नायक कहता है इसमें बुरा लगने की बात क्या है जो भी कहना है स्पष्ट कहना चाहिए तो अच्छा लगता है बुरा नहीं लगता है, इर नायक वादा करता है कि इसकी चिंता न करें मैं कुछ ऐसा गलत नहीं होगा ,तब जाकर नायिका को तसल्ली होती है और कहती है हां अब मैं आज से एक भी नहीं भयभीत होऊंगी आपसे ,,,,,,।
.................कहनी अब तक .....
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