एक अधूरी कहानी......तीसरा अंक
कहानी अब तक....... कृष्ण ने जब अम्बर का फोटो मांगा तो कहती है कि इतनी जल्दी है आपको को पहचानने में में नहीं दूंगी फोटो , कृष्ण जिद करने लगता है यार फ़ोटो तो ही मांग रहा हूं यदि आप नहीं देंगे तो कैसे आपको पहचान पाउगा तब जाकर अम्बर ने अपनी एक फोटो भेजी ....... वो भी एक अधूरी सी केवल अपने आंखों कि फोटो ,,,,,कृष्ण के लिए तो यह बड़ी बात थी न , उसे सायाद पहली बार किसी लड़की से इतनी बाते हुई थी और कोई लड़की अपनी अधूरी फ़ोटो भी भेजी वह उसे ही देखने लगा और उसके आंखों से ही बाते करने लगा मानो वह उसे अपने जीवन साथी मान बैठा हो, कृष्ण कभी कभी उदास सा रहने लगा क्योंकि जब उसकी बात अम्बर से नहीं होती थी तो वह उदास रहने लगा जैसे अम्बर उसके लिए आवश्यक सी हो गई हो .....वह तो सुरु में उससे मित्रता करने के लिए बात करता था लेकिन अब उसे अम्बर जीने के लिए बात करने लगा ,पता नहीं कृष्ण को हो क्या गया था । जब उससे बात होती तो वह खुश रहता था जब बात नहीं होती तो उदास । कभी कोई पूछता तो कह देता ऐसे ही कुछ काम है इसलिए कुछ चिंता है पर बताता नहीं था, बस ऐसे ही कृष्ण कभी खुश तो कभी गम में डूबने लगा । वह अपने आधार बिंदु से कहीं दूर जाने लगा ,गया था अध्ययन करने को जबलपुर पड़ गया एक अम्बर के पीछे .......! कुछ दिन तक अचानक अम्बर से बात नहीं होती तकरीबन 6 माह तक और वह उसे पहचानता भी नहीं अभी तक .... लेकिन अचानक जब वह उसे जबलपुर में बिग बाजार में मिलता है तो वह झट से पहचान लेता है क्योंकि कृष्ण ने उसकी आखों को बड़ी गौर से देखा और पाया की यह अम्बर जैसे ही लगती है । वह उसी रात्रि को एक मैसेज अम्बर को फिर से करता है तो अम्बर का जवाब आता है ,,,अभी मेसेज मत करना घर में सभी लोग है और मेरे मोबाइल को सभी लोग छूते है कभी भी मैसेज नहीं करना । यदि किसी को पता चल गया तो मुझे बहुत डाट पड़ेगी यह सुनकर कृष्ण को अच्छा लगा कि चलो ठीक है ,मतलब अम्बर के पास नंबर था लेकिन बात नहीं करती थी । ..................
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