एक अधूरी कहानी.......दूसरा अंक
कहानी अब तक ... कृष्ण ने अपने मित्र का नंबर तो संरक्षित कर लिया, पर किस नाम से करे यह उसके सामने एक समस्या बन गई क्योंकि उसे नाम तो पता नहीं था न, तो उसने उसका नाम अम्बर के नाम से मोबाइल पर नंबर संरक्षित कर लिया ।
लगभग एक सप्ताह के बाद कृष्ण शुरुवाती दौर में अम्बर को मोबाइल से संदेश भेजता है कि हेल्लो कैसे है आप.....?
अम्बर के मोबाइल से कुछ समय बाद उस संदेश के जवाब में आता है ............. मैं तो ठीक हूं पर आप कौन है ..?
यह जबाव देखकर कृष्ण मन ही मन मुस्कुराने लगा और अम्बर के भेजे हुए जबाव को बार बार देखने लगा और विचार करने लगा कि क्या बताऊं.... इतने में दूसरा मैसेज आया है आपने मेरा नंबर कहा से प्राप्त किया है ....? इसका उत्तर देवें अन्यथा मैं तुम्हारे नंबर को ब्लैक लिस्ट में डाल दूगी ।
यह देखकर कृष्ण ने तुरंत बोला ........अरे अरे,,,,, मैं आपका मित्र ही हूं पहचाने आप मुझे ।
इतने में पुनः मैसेज आता है बताते है नाम या ब्लैक लिस्ट में नंबर डालू...!
कृष्ण फिर कहता है मैं आपको जनता हूं आप अम्बर है एमएससी होम साइंस कॉलेज से कर रहे हैं ।
यह सुनकर अम्बर कहीं हां यह तो सही है ,,,,इतने में कृष्ण ने कहा देख लिया मैं जानता हूं न ,,,,,,,ऐसे ही आप भी मुझे जानते है ।
पर वास्तविकता तो यह थी कि न तो कृष्ण अम्बर को जनता था और न ही अम्बर कृष्ण को यह तो महज संयोग था कि कृष्ण को उस गुमनाम नंबर के संदेश की भाषा शैली ने उसके बारे में कुछ जानकारी दे दी ।
इसी क्रम में अब दोनों के बीच सुप्रभात, शुभरात्रि का सिलसिला प्रारंभ हो गया कहीं भोजन के विषय, तो कहीं सोने के विषय ,तो कहीं अध्ययन के विषय ऐसे नाना प्रकार के विषय के साथ चर्चा का क्रम बढ़ता गया ।
लेकिन अभी तक कृष्ण और अम्बर एक दूसरे को न तो जान पाए और न ही पहचान पाए क्योंकि बाते मैसेज से हो रही थी कृष्ण जब बाते करते हुए जिद करता है कि यार कम से कम अपने बारे में तो बताओ तब अम्बर ने अपनी बारे में बताई और कृष्ण ने भी अपने बारे में बताया ।
इसके बाद कृष्ण कहता है कि मेरे से दोस्ती करोगे तो अम्बर बोलती है ......तो यह मेरी अभी तक दुश्मनी थी क्या ..? इतने दिनों से आपसे बात कर रही हूं तो दोस्ती ही होगी न ,,,थोड़ी न दुश्मनी होगी ।
कृष्ण कहता है हां सही बात है दुश्मनी थोड़ी न होगी दोस्ती है इसलिए तो बात ही रही है ।
कुछ दिनों के बाद बात जब वाट्सएप में होने लगी तब फोटो भेजने की बात करता है कृष्ण ,,,,,,कहता है फोटो तो भेजें आप जिससे मैं कभी आपसे मिलू तो पहचान पाऊं ,,,,अम्बर कहती है वाह इतनी जल्दी पड़ी है ।
फिर उसने भेजा तो कृष्ण कहता है सच में नहीं पहचानता हूं ।
लगभग एक सप्ताह के बाद कृष्ण शुरुवाती दौर में अम्बर को मोबाइल से संदेश भेजता है कि हेल्लो कैसे है आप.....?
अम्बर के मोबाइल से कुछ समय बाद उस संदेश के जवाब में आता है ............. मैं तो ठीक हूं पर आप कौन है ..?
यह जबाव देखकर कृष्ण मन ही मन मुस्कुराने लगा और अम्बर के भेजे हुए जबाव को बार बार देखने लगा और विचार करने लगा कि क्या बताऊं.... इतने में दूसरा मैसेज आया है आपने मेरा नंबर कहा से प्राप्त किया है ....? इसका उत्तर देवें अन्यथा मैं तुम्हारे नंबर को ब्लैक लिस्ट में डाल दूगी ।
यह देखकर कृष्ण ने तुरंत बोला ........अरे अरे,,,,, मैं आपका मित्र ही हूं पहचाने आप मुझे ।
इतने में पुनः मैसेज आता है बताते है नाम या ब्लैक लिस्ट में नंबर डालू...!
कृष्ण फिर कहता है मैं आपको जनता हूं आप अम्बर है एमएससी होम साइंस कॉलेज से कर रहे हैं ।
यह सुनकर अम्बर कहीं हां यह तो सही है ,,,,इतने में कृष्ण ने कहा देख लिया मैं जानता हूं न ,,,,,,,ऐसे ही आप भी मुझे जानते है ।
पर वास्तविकता तो यह थी कि न तो कृष्ण अम्बर को जनता था और न ही अम्बर कृष्ण को यह तो महज संयोग था कि कृष्ण को उस गुमनाम नंबर के संदेश की भाषा शैली ने उसके बारे में कुछ जानकारी दे दी ।
इसी क्रम में अब दोनों के बीच सुप्रभात, शुभरात्रि का सिलसिला प्रारंभ हो गया कहीं भोजन के विषय, तो कहीं सोने के विषय ,तो कहीं अध्ययन के विषय ऐसे नाना प्रकार के विषय के साथ चर्चा का क्रम बढ़ता गया ।
लेकिन अभी तक कृष्ण और अम्बर एक दूसरे को न तो जान पाए और न ही पहचान पाए क्योंकि बाते मैसेज से हो रही थी कृष्ण जब बाते करते हुए जिद करता है कि यार कम से कम अपने बारे में तो बताओ तब अम्बर ने अपनी बारे में बताई और कृष्ण ने भी अपने बारे में बताया ।
इसके बाद कृष्ण कहता है कि मेरे से दोस्ती करोगे तो अम्बर बोलती है ......तो यह मेरी अभी तक दुश्मनी थी क्या ..? इतने दिनों से आपसे बात कर रही हूं तो दोस्ती ही होगी न ,,,थोड़ी न दुश्मनी होगी ।
कृष्ण कहता है हां सही बात है दुश्मनी थोड़ी न होगी दोस्ती है इसलिए तो बात ही रही है ।
कुछ दिनों के बाद बात जब वाट्सएप में होने लगी तब फोटो भेजने की बात करता है कृष्ण ,,,,,,कहता है फोटो तो भेजें आप जिससे मैं कभी आपसे मिलू तो पहचान पाऊं ,,,,अम्बर कहती है वाह इतनी जल्दी पड़ी है ।
फिर उसने भेजा तो कृष्ण कहता है सच में नहीं पहचानता हूं ।
................इंतजार ...कहानी अभी बाकी है ...!
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