एक अधूरी कहानी

प्रथम अंक:- 
एक बार की बात है जब कृष्ण (परिवर्तित नाम) घूमने अपने दोस्तों के साथ जबलपुर भेड़ाघाट गया था,उस समय उसकी उम्र लगभग 18 वर्ष की रही होगी और यह उम्र तो अपरिपक्व होता है, न समझ होता है ।
अकसर कृष्ण के दोस्त उसे ताने मारते रहते थे कि तुम कुछ नहीं कर सकते, न तो तुम अच्छे से अध्ययन कर पा रहे हो और न ही जीवन में मस्ती उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें क्योंकि वह एक सामान्य परिवार का बालक था वह परिवार की समस्त परिस्थितियों से बाखिप था इसलिए वह अपना मन मारके कुछ भी मस्ती नहीं करता था और न ही वह कहीं जाता था ।
लेकिन यह भेड़ाघाट की यात्रा उसके लिए बड़ी रोचक साबित हुई सभी दोस्त मस्ती के साथ अपने अपने बारे में बता रहे थे तभी अचानक girl friend ( महिला मित्र) की बात उठी तब एक मित्र ने तपाक से बोला अरे!!! देखो देखो मेरी महिला मित्र, इसी क्रम में सभी मित्र अपने अपने मित्र की तस्वीर दिखाने लगे, जब कृष्ण की बारी आई तो वह कहता है मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है ।
यह सुनकर सभी उस पर हंसने लगे वह बेचारा थोड़ा दुःखी भी हो गया और मन ही मन सोचने लगा की मैंने कौन सी गलती कर दी है कि मुझे इतना ताना सहना पड़ रहा है ।
कृष्ण विचार करने लगा कि वाकई में जीवन में एक महिला मित्र की आवश्यकता होती है यह जरूरी है क्या ...?
सभी मित्र भेड़ाघाट की यात्रा करके घर अा गए सभी ने बहुत मस्ती की थी पर कृष्ण के अब थोड़ा अनबन सा रहने लगा विचार करने लगा कि आखिर कार गर्लफ्रेंड क्यू होनी चाहिए...!
तभी अचानक एक दिन उसे एक लड़की का नंबर मिला और वह उस नंबर को मोबाइल में संरक्षित कर लिया था 
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कहानी अधूरी है ......कुछ दिनों बाद....

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