एक अधूरी कहानी........ पांचवा अंक
कहानी अब तक........अम्बर की शादी फिक्स हो चुकी थी दिसम्बर में शादी होनी बाली थी, कृष्ण खुद को समझाता रहता ठीक है जो भी ही रहा है सब सही है ।
बस कृष्ण, अम्बर की यह अधूरी कहानी अधूरी ही रह गई ।
इस बीच कृष्ण का अध्ययन कार्य भी छूट गया था वह अच्छे से अध्ययन भी नहीं कर सका, बस घूमता फिरता रहा और समय को काल्पनिक इश्क में बिता दिया .......!
यह इश्क नहीं था यह तो आकर्षण था दो दिलों के बीच जो कुछ ही दिनों में अलग अलग हो गया ।
ऐसे ही वर्तमान समय में कृष्ण और अम्बर के जैसे हजारों युवा, युवतियां अपने समय की बर्बादी इश्क या आकर्षण में लगा देते है और एक समय आता है कि वे टूट जाते है या आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते है जोकि गलत है ।
आज के युवाओं में तो अब यह प्रवत्ति बड़े स्तर में देखा जाने लगा है लगभग 16-17 वर्ष से ही यह कहानी सुरु हो जाती है जबकि यही वह समय होता है जब उनको अपना भविष्य बनाने का समय होता है ।
खैर सब ठीक है ........... परिवर्तित समाज और परिवर्तित समय के बीच संभलना जरूरी है ।
खुद को समझो .............!
पाठकों को नमस्कार ...!
यह एक काल्पनिक कहानी है .......!
निर्मल कुमार साहू (एड.)
बस कृष्ण, अम्बर की यह अधूरी कहानी अधूरी ही रह गई ।
इस बीच कृष्ण का अध्ययन कार्य भी छूट गया था वह अच्छे से अध्ययन भी नहीं कर सका, बस घूमता फिरता रहा और समय को काल्पनिक इश्क में बिता दिया .......!
यह इश्क नहीं था यह तो आकर्षण था दो दिलों के बीच जो कुछ ही दिनों में अलग अलग हो गया ।
ऐसे ही वर्तमान समय में कृष्ण और अम्बर के जैसे हजारों युवा, युवतियां अपने समय की बर्बादी इश्क या आकर्षण में लगा देते है और एक समय आता है कि वे टूट जाते है या आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते है जोकि गलत है ।
आज के युवाओं में तो अब यह प्रवत्ति बड़े स्तर में देखा जाने लगा है लगभग 16-17 वर्ष से ही यह कहानी सुरु हो जाती है जबकि यही वह समय होता है जब उनको अपना भविष्य बनाने का समय होता है ।
खैर सब ठीक है ........... परिवर्तित समाज और परिवर्तित समय के बीच संभलना जरूरी है ।
खुद को समझो .............!
पाठकों को नमस्कार ...!
यह एक काल्पनिक कहानी है .......!
निर्मल कुमार साहू (एड.)
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