स्वार्थ की राजनीती कही फिर से तो न करे राष्ट्रीय पर्व का अपमान
निर्मल साहू(एड.):- शहपुरा नगर हमेसा विवादों में फंसा रहने बाला नगर बन चुका है, नगर की सफाई से लेकर भू-गवन जैसे मामले इन दिनों अखबारों, दूर-संचार माध्यमों के माध्यम से सुर्खियां बटोर रहे है ऐसा लगता है जैसे नगर है या विवाद की नगरी .....!
राजनीती तो ऐसी है कि अपने वर्चस्व की लड़ाई में राष्ट्रीय पर्व को भी दाव में लगा देते है ।
ज्ञातव्य हो की विगत वर्ष राष्ट्रीय पर्व के दिन एक ही तिरंगे को दो-दो व्यक्ति अपने-अपने ताकत के बल पर ध्वजा रोहण करने में लगे थे जिसमें तिरंगे का अपमान हुआ था जबकि वहा पर प्रशासनिक अधिकारी से लेकर पुलिस प्रशासन भी चौकसी में लगी थी की कही कुछ अनहोनी न हो जाए और आखिर वही हुआ जो नहीं होना चाहिए था ।
प्रशासन ,पुलिस प्रशासन केवल मुँह ताकती रह गई थी तथा कुछ भी प्रतिबंधात्मक कार्यवाही नहीं कर सकी ।
कही यह घटना इस बार भी 15 अगस्त 2018 को गांधी चौक शहपुरा में तो न घटे....?
और यह घटना पुनः पूर्व की भांति नहीं होनी चाहिए लेकिन शहपुरा की राजनीतीक परिस्थितियां तो कुछ और ही कह रही है लगता है इस बार भी स्वार्थ की राजनीती राष्ट्रीय पर्व के अपमान करने में तुली हुई हैं ।
इसलिए प्रशासन को पूर्व से ही इस विषय में विचार-विमर्श करके सुरक्षा और व्यवस्था का इंतजाम करनी चाहिए अन्यथा इस बार जनता न तो राजनितिक प्रतिनिधि और न ही प्रशासन को माफ़ करेंगी ।
जिसका सम्पूर्ण जिम्मा प्रशासन की होगी ।
राजनीती तो ऐसी है कि अपने वर्चस्व की लड़ाई में राष्ट्रीय पर्व को भी दाव में लगा देते है ।
ज्ञातव्य हो की विगत वर्ष राष्ट्रीय पर्व के दिन एक ही तिरंगे को दो-दो व्यक्ति अपने-अपने ताकत के बल पर ध्वजा रोहण करने में लगे थे जिसमें तिरंगे का अपमान हुआ था जबकि वहा पर प्रशासनिक अधिकारी से लेकर पुलिस प्रशासन भी चौकसी में लगी थी की कही कुछ अनहोनी न हो जाए और आखिर वही हुआ जो नहीं होना चाहिए था ।
प्रशासन ,पुलिस प्रशासन केवल मुँह ताकती रह गई थी तथा कुछ भी प्रतिबंधात्मक कार्यवाही नहीं कर सकी ।
कही यह घटना इस बार भी 15 अगस्त 2018 को गांधी चौक शहपुरा में तो न घटे....?
और यह घटना पुनः पूर्व की भांति नहीं होनी चाहिए लेकिन शहपुरा की राजनीतीक परिस्थितियां तो कुछ और ही कह रही है लगता है इस बार भी स्वार्थ की राजनीती राष्ट्रीय पर्व के अपमान करने में तुली हुई हैं ।
इसलिए प्रशासन को पूर्व से ही इस विषय में विचार-विमर्श करके सुरक्षा और व्यवस्था का इंतजाम करनी चाहिए अन्यथा इस बार जनता न तो राजनितिक प्रतिनिधि और न ही प्रशासन को माफ़ करेंगी ।
जिसका सम्पूर्ण जिम्मा प्रशासन की होगी ।
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