अंजान रिश्ते अंजान रास्ते..........

निर्मल साहू (एड.) :- व्यक्ति बहुत कुछ पाना चाहता है , चाहने की चाहत देखी जाये तो व्यक्ति हर पल कुछ नया और अधिक पाने की चाहत रखता है, इसी क्रम में कुछ दिनों से जब मैं fb में देख रहा हूँ की कुछ एक व्यक्ति अपनी बातों को बखूबी से रखते है चाहे अच्छी बात हो या बुरी पर ,बतलाते तो है कि उनकी चाहत क्या हैं ?
कुछ तो इस आस में ही fb को चलाते है कि कुछ मित्रों से बात हो जाये तो कुछ नए मित्र बन जाये वो चाहे महिला मित्र हो या पुरुष ,,,,, क्योंकि यह भी तो एक चाहत ही है ।
व्यक्ति जीवन में आपार पैसे , यश, प्रतिष्ठा , मान सम्मान की चाहत रखता है ।
पर इस बात को भूल जाता है कि कुछ समय या वर्ष पहले उसने किसी और के साथ वही दोस्ती की चाहत रखी थी जो आज वह fb में किसी और की तलाश में लगा रहता है ।
वह उस बात को भूल जाता है कि इंशान की फितरत ही अलग है वह अंजान रिश्ते को कुछ समय के लिए ही बरकरार रख सकता है फिर वो रिश्ते एक अंजान रास्ते की तरह हो जाती है , जिसका उसे कभी फ़िक्र ही नहीं होता है ।
खैर सब सही है सोशल मीडिया की यही कहानी है ....
अंजान रिश्ते अंजान रास्ते बस कुछ ही समय के लिए होते है हाँ पर कुछ एक तो इस कदर सफल हो जाती है कि वह जीवन भर के लिए हो जाती है ।

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