क्या पेट्रोलियम तय करेगी सियासत .........

निर्मल = इन दिनों गलियो मे एक ही शोर है पेट्रोल और डीजल का कोई कहता है सरकार क्या चाहती है सरकार फिर से बनानी है या यू ही फिर 70 वर्ष के लिए पुनः बुक कर दे , बड़ी हास्यास्पद बाते चल रही है और तौर इनके बीच कुछ लोग सरकार विरोधी भी होते है वो तो त्वरण के समान कार्य करते है बिलकुन  और बढा चढ़ा कर बताने लगते है हाँ यह सरकार कर क्या रही है बस कुछ योजना है जो की कई वर्षो से चल रही थी उसी का नाम ही तो बदला गया है । तो कुछ लोग तो यह कहते है सरकार कुछ नहीं कर रही यह तो पहले से था जो अभी है इस प्रकार त्वरण रूपी लोग समाज मे सक्रिय होकर लोगो के मन को सरकार विरोधी बना रहे है । 
वास्तविकता तो यह है की राजनीति में सब जायज है मंदिर मस्जिद जाती पाती अब आ गया पेट्रोल और डीजल जो की नया है सियासत के लिए नया है चलेगा बाजार मे इसलिए इसमे सियासत करना भी जरूरी है इस प्रकार की राजनीति मे पिस रहा है तो मात्र आमजन जिसको कुछ हासिल भी नहीं होनी है । 
क्यो ना कुछ समझे और खुद से कुछ कार्य करे ......................?

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