कुछ प्रशासनिक अधिकारी यू कहें जनता पर रोंव का कारण तो अतिसोयुक्ति नहीं

जबलपुर:- आज कल प्रशाशनिक अधिकारियों की खुशामत करने की प्रथा ज़ोरो पर हैं और शहर में इसकी होड़ मची है। लोगो को अपनी योग्यता से ज्यादा जिहज़ूरी पर ज्यादा  विश्वास हैं। पतानहीं क्यों लोगो को ऐसा लगता है कि प्रशाशनिक अधिकारियों से जोड़े रहने से ही उन्हें उनके काम में  सफलता प्राप्त होगी। मैं ऐसा नही सोचता , हमारी  योग्यता और कुशलता  ही हमारी सफलता का कारण है। हमे ये ध्यान रखना चाहिए कि जिन्हें हम प्रशाशनिक अधिकारी के नाम से संबोधित करते है वे जनता सेवक है अर्थात सरकारी कर्मचारी, हिंदुस्तान में हर सरकारी  कर्मचारी  जनता का सेवक हैं  और  वो अधिकारी सिर्फ जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए है, जनता पे अधिकार जताने के लिए नही। सरकारी अधिकारी को कानून ने अधिकार, कानून के पालन के लिए दिए है ना की अधिकारिता जताने या राज करने के लिए। ये जनता को समझना जरुरतो है। कानून की दुनिया का एक हिस्सा और वकील  होने के नाते  मुझे ये लगता है की यदी मुझे जनता के हित में और जनता के लिए वकालत करनी है तो मुझे  दरबारी  नही बनना,मिझे सरकारी नही बनना।


श्री संकल्प दुबे (अधिवक्ता)
जगदलपुर जिला एवं सत्र न्यायलय छत्तिसगढ़
                           

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